क्रिसमस कब और क्यो मनाया जाता है (Why Christmas is celebrated)

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क्रिसमस क्यों मनाया जाता है (Why Christmas is celebrated)

क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीसु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला त्योहार है। ईसाईयों का यीसु (Jesus) के बारे में ये मानना है कि मसीहा (God) मरियम के पुत्र के रूप में पैदा हुए है तब से ये त्योहार अपने मसीहा के जन्म के खुशी में मनाते है। ईसा मसीह सबको प्रेम और इंसानियत की बात बताते थे और यही चीज़ वहां के शासकों को पसंद नही आई और उन्होंने ईसा मसीह (Jesus) को शूली पे चढ़ा दिया। ईसा मसीह को परमेश्वर का पुत्र भी कहा जाता है।

शुरुआत में ईसाई समुदाय के लोग यीसु यानी ईसा मसीह के जन्मदिन को एक त्योहार के रूप में नही मानते थे, लेकिन चौथी शताब्दी के आते- आते उनके जन्मदिन को त्योहार के तौर पर मनाया जाने लगा। ये त्योहार ईसाई धर्म का है पर कुछ गैर ईसाई भी इसे बड़े ही धूम धाम से मनाते है। ये त्योहार ईसाईयों का सबसे बड़ा त्योहार है ये त्योहार हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। क्रिसमस के 10 दिन पहले से सारी तैयारियाँ शुरु हो जाती है लगभग सारे देशों में कॉलेज, ऑफ़िस सब 1 सप्ताह तक बन्द रहते है। बाजारों की रौनक बढ़ जाती है और घरों की सजावट होने लगती है।


क्रिसमस कब मनाया जाता है (When Christmas is celebrated)

क्रिसमस हर साल 25 दिसम्बर यानी जब बड़े दिन की शुरूआत होती है तब मनाया जाता है इसलिए इसे बड़ा दिन भी कहते है। ब्रिटेन और दूसरे देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानी 26 दिसम्बर बॉक्सिंग डे (boxing day) के रूप में मनाया जाता है। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है, वो जलियन वेर्सिओ के अनुसार 25 दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है, जो ज्यादा काम मे आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 जनवरी का दिन होता है क्योंकि इन दोनों कैलेंडर में 13 दिनों का अंतर होता है। कई जगहों पर क्रिसमस की तैयारी एक महीने पहले से शुरु हो जाती है। इंडिया के गोआ में ये त्योहार 15 दिसम्बर से 10 जनवरी तक चलता है जहाँ देश भर से लोग यहाँ क्रिसमस मनाने आते है।


क्रिसमस की सजावट (Christmas decorations)

क्रिसमस के 1 सप्ताह पहले से ही घरो को रंग बिरंगी रोशनियों से सजा दिया जाता है। बाजार और सड़क एक दुल्हन के रूप की तरह सजे हुए दिखने लगते है। चर्च में समारोह और तरह-तरह की सजावट होती है। लोग अपने घरों के अंदर या बाहर क्रिसमस ट्री की सजावट रंग बिरंगी लाइट, gift, chocolate, घन्टी (bell), और क्रिसमस के आभूषण से करते है। ये सब देखने मे ऐसा लगता है मानो सारे साल का त्योहार एक बार ही मनाया जा रहा।

क्रिसमस कैसे मनाया जाता है ( How Christmas is celebrated)

इस दिन लोग एक दूसरे को gifts और cards देकर क्रिसमस की बधाइयाँ देते है। क्रिसमस से कई दिन पहले ही सभी ईसाई समुदाय के लोगो द्वारा कैरोल्स गाए जाते है और प्रार्थनाएं की जाती है। सारी दुनिया के गिरजाघरों में यीसु (Jesus) की जन्मगाथा नाटक के रूप में दिखाया जाता है। इस त्योहार में केक के साथ मुँह मीठा करने का बहुत महत्व है ठीक 12 बजे लोग केक काटते है और बधाईयां देखर एक दूसरे का मुंह मीठा करते है और कुछ लोग सांताक्लास की वेशभुषा पहन कर बच्चो को खुश कर देते है।

क्रिसमस ट्री (Christmas tree)

क्रिसमस ट्री एक सदाबहार, फर, या बालसम का पेड़ होता है। जिस पर क्रिसमस के दिन lights, gifts, घंटियों (bells), chocolates, रूई, क्रिसमस के आभूषणों आदि से सजाया जाता है। अनुमान ये है कि इस प्रथा की शुरुआत प्राचीन काल में मिस्रवासियों, चीनियों या हिबूर लोगो ने की थी।

यूरोप के लोग भी सदाबहार पेड़ो से घरों को सजाते थे। उनका विश्वास था कि इन पौधों को घर मे सजाने से बुरी सक्तिया दूर रहती है। आधुनिक क्रिसमस ट्री की शुरुआत पश्चिम जर्मनी में हुई। मध्यकाल (mid century) में एक लोकप्रिय नाटक के समय ईडन गार्डन को दिखाने के लिए फर के पेड़ का इस्तेमाल किया गया जिस पर सेब लटकाए गए। उसके बाद जर्मनी के लोगो ने 24 दिसम्बर को फर या सदाबहार के पेड़ से अपने घरों की सजावट करनी शुरू कर दी। इंग्लैंड में प्रिंस अलबर्ट ने 1841 ई. में विंडसर कैसल में पहला क्रिसमस ट्री लगाया था।


सांता क्लास (Santa claus)

सांता क्लास क्रिसमस का एक अहम हिस्सा है बच्चे उनका बेसब्री से इंतजार करते है। सांता क्लास की प्रथा संत निकोलस ने चौथी या पांचवी सदी में शुरू की इनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के बाद लगभग 280 साल बाद मायरा में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन ईसा मसीह को समर्पित कर दिया। उन्हें लोगो की मदत करना बहुत पसंद था यही वजह थी कि वो ईसा मसीह के जन्मदिन के मौके पर रात के अंधरे में जिससे उन्हें कोई देख न पाए बच्चो को गिफ्ट दिया करते थे। सत्रहवीं सदी तक संत निकोलस का नाम सांता क्लॉज हो गया। यह नाम डेनमार्क वासियों द्वारा दिया गया।

 

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