पीलिया (Jaundice) क्या है कैसे होता है कारण , बचाव , लक्षण और घरेलु उपचार

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पीलिया (Jaundice) क्या है

पीलिया क्या है (what is Jaundice)

रक्त में bilirubin नामक एक रंग होता है जिसके बढ़ जाने से त्वचा और श्लेष्मिक कला का रंग पीला हो जाता है इस अवस्था को पीलिया (Jaundice) कहते है। यह सामान्यतः खुजली से संबंध रखती है। काले मूत्र के साथ साथ मल भी पीला हो जाता है। शिशुओं में अगर bilirubin का स्तर बहुत समय तक ज्यादा बढ़ा रहा तो एक तरह का दिमाग क्षति जिसे pernicious कहते है ।

पीलिया गैर गंभीर से संभावित घातक हो सकता है। रक्त में bilirubin का स्तर सामान्यतः 1.0 mg/dL के नीचे होता है और 2-3 mg/dL के ऊपर स्टार बढ़ जाने पर पीलिया रोग हो जाता है। बढ़ा हुआ bilirubin दो प्रकार में बंटा होता है – विसंयुग्मित (अप्रत्यक्ष) और संयुग्मित (प्रत्यक्ष) । प्रत्यक्ष bilirubin मूत्र में bilirubin की अधिकता से निश्चित किया जा सकता है। उच्च अप्रत्यक्ष bilirubin अधिक लाल रक्त कोशिका के टूटने , ज्यादा चोट , अनुवांशिक अवस्था , अधिक संकय तक कुछ न खाने , नवजात पीलिया या थायरॉइड दिक्कत से हो सकता है।

उच्च प्रत्यक्ष bilirubin  लिवर रोग जैसे cirrhosis या hepatitis, संक्रमण , औषधि प्रयोग या पित्त वाहिनी (bile duct) में रुकावट के कारण हो सकता है। विकसित देशों में अक्सर पित्त वाहिनी में रुकावट या औषधि प्रयोग इसके ज्यादा कारण है जबकि विकासशील देशो में यह अक्सर संक्रमण जैसे viral hepatitis, leptospirosis, schistosomiasis या malaria इसके ज्यादा कारण है।

पीलिया  के प्रकार (jaundice types)


ये तीन प्रकार के होते है

1 हेमोलिटिक जॉन्डिस

2 हैपेटोसेलूलर जॉन्डिस

3 ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस

हेमोलिटिक जॉन्डिस 

जब लाल रक्त कोशिकाएं वक्त से पहले टूट जाये तो बिलीरुबिन इतनी ज्यादा मात्रा में पैदा हो  जाता है की जिसे लीवर सम्भाल नही पाता हैं यानी फिल्टर नही कर पाता है और इस कॉटन बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाने से पीलिया हो जाता है। जिससे त्वचा और आँखे पीली दिखाई देने लगती है जिसे प्री- हेपेटिक पिलिया या हेमोलिटिक पीलिया कहते है यह कुछ दवाईयो  के दुष्प्रभाव से भी हो सकता है।

हेपेटोसेलूलर जॉन्डिस 

कभी – कभी लिवर की कोशिकाओं में समस्या होने से पिलिया हो जाता है और नवजात शिशुओं में इंजाइमो की परिपक्वता की कमी होती है जो बिलीरुबिन के प्रकिया के लिए जरूरी होता है और उनका लिवर सही से विकशित नही हो पाता है जिसका कारण भी पीलिया हो जाता है। और बड़ो में ये शराब ,विषाक्त पदार्थों  औऱ दवाइयों के सेवन से कोशिका को नुकशान होता है तो हेपेटोसेलूलर जॉन्डिस  हो जाता है।

ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस 

इसमें पित्त नलिका में रुकावट की वजह से बिलीरुबिन बढ़ जाता हैं जिससके urine में फैलने से उसका रंग पीला जो जाता है जिससे ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस हो जाता है।

लक्षण 

पीलिया का सबसे बड़ा लक्षण आखो का सफेद भाग पिला होना और त्वचा भी पिले होने लगते हैं

पीलिया के लक्षण निम्न है

  • कमजोरी
  • थकान
  • बुखार
  • वजन में कमी
  • भूख न लगना
  • पेट दर्द
  • हल्के रंग का मल
  • मतली
  • सिर दर्द
  • कब्ज
  • गहरे रंग का मूत्र
  • शरीर मे जलन आदि

अगर आप अपने आपको खुश एवं स्वथ्य रखना चाहते हैं तो अपने लिवर को स्वथ्य और शराब से दूर रखें , तथा नसीलि पदार्थो का सेवन न करे।

पीलिया के कारण (causes of jaundice)

यदि रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा 2.5 से ज्यादा हो जाता है तो लीवर की गंदगी साफ होने की प्रक्रिया बन्द हो जाती है तो इसके कारण पीलिया हो जाता है।

पीलिया से बचाव (prevention of jaundice)

पीलिया होने से कैसे रोका जा सकता है

लिवर शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है जो पाचक रस बनाता है और भोजन को पचता है इसके साथ-साथ ब्लड का थक्का जमने की प्रक्रिया रोगियों द्वारा ली गई। मोटाबोलिज्म कार्य और विषाक्त पदार्थों को शरीर से भी बाहर निकालता है और इस लिए लिवर को सुरक्षित रखना चाहिए।

जैसे

     ● संतुलित भोजन

  • नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करना
  • पीने का पानी साफ और स्वच्छ हो
  • नसीलि पदार्थो का सेवन न करे
  • एक से अधिक के साथ यौन सम्बन्ध बनाना ।

पीलिया की जांच ( jaundice test )

पीलिया का परीक्षण 

पीलिया का इलाज शारीरिक परीक्षण के आधार पर की जाती है और इसमें लिवर का सबसे पहले चेक होता है कि लिवर अपना के सही से कर रहा है कि नही ।और यह एक बार की परीक्षण में नही बल्कि की बार की परीक्षण में पता चलता है।

यदि लक्षणों का कोई कारण परीक्षण से नही पता चलता है तो रक्त परीक्षण अवश्य कराये ताकि बिलीरुबिन की स्तर का जाच हो सके और रक्त की संरचना का पता लगाया जा सके।

1 बिलीरुबिन टेस्ट

संयुग्मित बिलीरुबिन के स्तर के बराबर असन्तुलित का स्तर हेमोलिसिस को दर्शाता है।

 2 कम्प्लीट ब्लड कॉउट टेस्ट 

यह टेस्ट रक्त कोशिकाओं की गणना करने के लिए की जाती है

 3 हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस B और C का परीक्षण किया जाता है।

पीलिया का इलाज (jaundice treatment)

आयरन की गोलियां या अधिक आयरन युक्त पदार्थ खाने से आयरन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे अनीमिया से होने वाले पीलिया का इलाज होता हैं।

जैसे ही पीलिया का परीक्षण समाप्त हो जाता है वैसे ही उसकी इलाज शुरू कर दी जाती है।

पीलिया से पीड़ित व्यक्ति के लिए कुछ जरूरी टिप्स (jaundice diet)

 उचित खान – पान (डाइट) 

किसी भी बीमारी में बीमारी से चुटकारा पाने के लिए सन्तुलित भोजन का सेवन करें और भोजन दिन में 3-4 बार थोड़ा – थोड़ा ही खाये और खाना खाने से पहले हाथ को स्वच्छ और साफ कर ले।

जिससे किसी भी प्रकार के बैक्टिरिया का इन्फेक्शन न हो और शुध्द पानी का सेवन करें।

पीलिया में क्या खाएं 

पीलिया के रोगियों को हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए और सबसे अधिक रोगियों को कड़वी चीज यानी करेले का जूस पिलाये और साथ मे मूली, टमाटर, चुकन्दर, नीबू, आदि के भी जूस पिलाये।

फल

पीलिया के रोगियों को नारियल के पानी और मठ्ठा भी पिलाये और साथ मे सन्तरा, मुसम्मी, अंगूर, अनार आदि का जूस पिलाये।

पीलिया में क्या न खाए

पीलिया में रोगी को बाजार के समान को बिल्कुल नही खाना चाहिए। और तेल में बने चीजो को भी न खाए

और साथ ही मांसाहारी भोजन का सेवन न करे।

  • पीलिया की दवा ( medicine for jaundice) 
  • Dabur he pani
  • Dabur lauhasave
  • D38 syrup
  • Divya godhan ark
  • Himalaya Liv.52
  • Baidyanath livered
NOTE
ये ध्यान रहे कि डॉक्टर के बिना सलाह लिए किसी भी दवाइयों  का सेवन न करे।

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